Sunday, September 20, 2009

कृपया मार्गदर्शन करें

मेरे साथ बड़ी दिक्कत होगई ,मैं कम्प्यूटर में कुछ जानता नहीं और इन्टरनेट की साइड खुलना बंद हो गई ,कम्प्यूटर इन्टरनेट कनेक्ट बतलाता था - मैं जहाँ इस वक्त हूँ वहां कोई जानकार भी नहीं है झालावाड राजस्थान जिले की छोटी सी तहसील पिरावा , केवल एक दुकान ,तो मैंने उन्हें जाकर प्रॉब्लम बतलाई ,बोले ठीक कर दूंगा ,वे आये और डब्बा (सी पी यूं ) उठाकर ले गए ,दूसरे दिन वापस इन्टरनेट भी कनेक्ट और साइड भी खुलने लगी

वे चतुर सुजान बोले ,मैंने फोर्मेट कर दिया है ,मुझे क्या पता ये क्या होता है मैंने सोचा अब कोई लेख लिख डालें पहले मैंने गुलाम अली साहिब की ग़ज़ल सुनना चाही जो मेरे कंप्यूटर में थी ,जैसे ही ग़ज़ल सुनना चाही मीडिया प्लेयर पर सन्देश आया……not be a sound device installed or it may not bhee functioning properly मैंने सोचा मत सुनो ,कुछ लिखें , गूगल का ट्रांसलेशन खोल कर कुछ लिखा और जैसे ही मैं अपने डाक्यूमेंट पर लेगया तो वहां हर शब्द की जगह चोकोर डब्बे जैसे कुछ बन गए कुछ इस तरह के ()()()()()()( गोल नहीं बल्कि चौकोर )

अब इतनी क्षमता तो है नहीं कि डायरेक्ट ब्लॉग पर लिखदूं ,पहले तो डाक्यूमेंट पर सेव कर दुरुस्ती करता था फिर सोचा लेख न सही टिप्पणी ही सही ,कुछ ब्लॉग खोले तो ब्लॉग तो खुले लेकिन लेख या रचना की जगह वही ०००००००००० अब क्या तो पढू और क्या टिप्पणी करूं ,भाई मेरे कंप्यूटर का फॉण्ट उन चतुर सुजान ने फोर्मेट करके गायब कर दिया तो ,तो क्या हुआ दूसरे के कंप्यूटर में तो होगा ,डायरेक्ट टिप्पणी लिख दूंगा मगर नहीं तो मुझे एक किस्सा याद आगया

एक पटेल थे अंधे ,पास के गाव में समधी के यहाँ गए ,बातें करते खाना खाते अँधेरा हो गया , पटेल ने कहा अब चलें , समधी ने कहा लालटेन ले जाओ पटेल पटेल ने कहा क्यों मजाक उडाते हो ,हमें लालटेन से क्या मतलब है ,समधी ने कहा ये बात नहीं अँधेरे में तुमसे कोई टकरा न जाये इसलिए खैर पटेल लालटेन लेकर चल पड़े ,लेकिन वही हुआ ,"रास्ते में उनसे मुलाकात हुई , जिससे डरते थे वही बात हुई "" एक सज्जन रस्ते में पटेल से टकरा गए पटेल ने कहा भैया हम तो जानमान अंधे हैं पर तुमऊ का अंधे हौ जो हमनते टकरा रहे हौ - बोले दादा माफ़ करियो अँधेरे में कछू सूझो नाय पटेल ने कहा जई वास्ते तो हम लालटेन लै कै आए हते , सज्जन ने कहा तौ दादा लालटेन जला तो लेते

खैर सा'ब, वे चतुर सुजान तो एक दिन एक सी डी लेकर आये और ७०-८० फॉण्ट डाल गए मगर मेरी समस्या बरक़रार है मैं साहित्य पढने से वंचित हो रहा हूँ साथ ही टिप्पणी करने से भी ,कृपया कोई सरल सी तरकीब बतलादें ,ताकि में ब्लॉग पढ़ सकूं एक बात और किसी किसी ब्लॉग में यह दिक्कत नहीं भी आरही किन्तु ज्यादातर ब्लॉग पढने में आरही है

11 comments:

सतीश सक्सेना said...

Step 1
-Please open internet explorer
-click to View
-click encoding
-click unicode (UTF-8)

Step 2
go to control panel
click Reagional and language option
click language tab
click install file for complex script...(including thai )
click ok
computer will search windows files or windows CD please provide Path
and restart the computer.

JHAROKHA said...

आदरणीय श्रीवास्तव जी,
आप सतीश जी द्वारा सुझाये गये तरीके पर अमल करें
मुझे लगता है आपकी समस्या हल हो जायेगी।
नवरात्र की हार्दिक शुभकामनायें।
पूनम

hem pandey said...

फॉण्ट संबन्धी इससे मिलती जुलती समस्या फोर्मेटिंग के बाद मेरे सिस्टम में भी आ रही है.लेकिन काम चल रहा है. ज्यादा समस्या आने पर यहाँ दुरुस्ती की सभी व्यवस्थाएं हैं.

मुकेश कुमार तिवारी said...

आदरणीय बृज सर,

फॉण्ट की समस्या का सबसे सरल तरीका तो श्री सतीश जी ने आपसे बताया ही है और वैसे भी यदि यह तरीका पटेल सा(दुकान वाले भिया)से भी बताया तो शायद मदद कर पाये।

यदि नही तो अपने सिस्टम पर हिन्दी भाषा को सेट करने के लिये गूगल सर्च से भी मदद ले सकते हैं वहाँ डाऊनलोड़ करने लायक लिंक मिल जायेगा।

www.baraha.com/download.htm लिंक इस्तेमाल करके भी आप बाराह इन्पुट मेथड़ एडीटर डाऊनलोड़ कर सकते हैं।

वैसे मुख्यतः व्यंग्य ही लगा लेकिन मर्म तक आते हुये समय लगा। आपकी समस्या में निदान हो इसी शुभकामनाओं के साथ,

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

creativekona said...

आदरणीय श्रीवास्तव जी,
उम्मीद करता हूं अब तक आपकी समस्या का निदान हो गया होगा।
आपको ईद और नवरात्र की हार्दिक बधाई।
हेमन्त कुमार

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बृ्जमोहन जी, हम तो अभी तक तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि सचमुच आप इस समस्या से ग्रस्त हैं या कि ये व्यंग्य है।...लय तो व्यंग्य वाली ही है:)
यदि वाकई में ये समस्या आपको आ रही है तो इस विषय में हमसे तो किसी मदद की आशा ही न करें क्यों कि इस विषय में हम भी "चतुर सुजान" ही हैं:))

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

समस्या का समाधान तो बता दिया है ऊपर लोगों ने। आपने मैग्लोमैनियक के बारे में कहा - उसमे कोई व्यंग नहीं था। मैग्लोमैनियक नाम की आई.डी. से एक सज्जन ने झरोखा ब्लॉग पर टिप्पणी की थी। मैं उसे संदर्भित कर रहा था।
धन्यवाद।

मुकेश कुमार तिवारी said...

आदरणीय बृज सर,

मैंने कोई निर्देश दिया ऐसा नही था, मेरा आशय तो सिर्फ आपको समस्या से निजात दिला पाने का था यदि आपने ऐसा महसूस किया हो तो मैं दिल से क्षमाप्रार्थी हूँ।

अलबत्ता एक बात और आपसे शेयर करना चाहूंगा कि बाराह साफ्टवेयर जब चालू होता है तो कम्प्यूटर की सिस्टम ट्रे आईकान बन जाता है उस राईट क्लिक कर भाषा बदली जा सकती है इंग्लिश, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम आदि। अपनी इच्छित भाषा का चयन किया जा सकता है।

और यदि अब भी नही हो पाये तो कम्प्यूटर के सेटिंग में जाकर श्री सतीश सक्सेना साहब के बताये हुये रास्ते से जा कर समस्या का निदान किया जा सकता है।

आगे बताईयेगा।

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

दिगम्बर नासवा said...

AADARNIY SHRIVAASTAV JI ....
NAV RAATRI KI BAHOOT BAHOOT SHUBHKAAMNAAYEN ...... MUJHE TO YE AAPKA LIKHA EK AUR LAJAWAAB VYANG HI LAGTA HAI ...

Mumukshh Ki Rachanain said...

अपने कम्पूटर पर तो ऐसी कोई समस्या कभी आई नहीं, इसलिए कोई जानकारी निदान की भी नहीं.
कम्पूटर इक्सपर्ट नहीं हूँ न.
सतीश जी के सुझाये तरीकों से यदि सफलता मिल गई हो तो, सूचित करें, ताकि हम भी नोट कर रख लें की कभी भविष्य में ऐसी समस्या आये तो हम भी ऐसे ही निदान कर सकें.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

naveentyagi said...

brajmohan ji mera sochna bhi vats ji jaisa hai.