Friday, March 26, 2010

सर दर्द

दुनिया में वैसे तो बहुत तरह के दर्द हैं ,मगर एक प्रमुख दर्द है सरदर्द | वैध्य तो यही कहेगा "अंत भारी तो माथ भारी "" मगर आजकल तो सरदर्द की गोलियां सरल , सुगम व् सस्ता इलाज़ है , एक दिन उन्होंने कहा गोलियां रिएक्शन करती है तो मैंने कहा चन्दन घिस कर लगाइए |बोले हमें मालूम है मगर "" दर्दे सर के वास्ते है अर्क संदल का मुफीद ,पर ,उसका घिसना ,घिस के मलना यह भी इक सरदर्द है |

कभी कभी कोइ पड़ौसी भी पड़ौसी के लिए सरदर्द हो जाता है |एक दिन से वे एक पेंचकस लेकर आये बोले इसे आप रखलें ,पूछा क्यों ? तो बोले मै अपने सारे औजार एक ही जगह रखना पसंद करता हूँ |

वैसे तो एक दिल का दर्द भी होता है ,बहुत शेर पढ़े गए बहुत कवितायें लिखी गई बहुत फ़िल्मी गाने बने |पुराने जमाने में दिल पर लिखे गए गानों का बड़ा क्रेज़ था यकीन मानिए ऐसे ऐसे गाने कि इस दिल के टुकड़े हज़ार हुए कोई यहाँ गिरा कोइ वहां गिरा । गोया दिल दिल न हुआ कार में लगा ग्लास हो जो एक्सीडेंट से बिखर गया हो |

हकीकत यह भी है जिन्हें दिल में दर्द होता है वह तो कोइ एसीडिटी ,गैस वगैरा का होता है और जिन्हें वास्तव में दर्द होता है वे तो बतला ही कहाँ पाते है । सिर और दिल के अलावा भी कई दर्द होते है कोई कहाँ तक गिनाये |""वो मुझसे पूछते है दर्द कहाँ होता है ? अरे एक जगह हो तो बतादूँ कि यहाँ होता है ""दर्द का विवरण आयुर्वेदिक ग्रंथों में ज्यादा पाया जाता है ।उस जमाने में आलपरपज पेन किलर नहीं होते थे |हर दर्द की अलग दबा हुआ करती थी । उन ग्रंथों में लिखा है दर्द चौरासी प्रकार के होते है | पुराने ग्रंथों में चौरासी का बड़ा महत्त्व है ,चौरासी प्रकार की बात व्याधियां ,चौरासी आसन ,चौरासी प्रकार के चक्षु रोग | फिर भी चौरासी से काम न चला तो चौरासी लाख योनियाँ |भाई कमाल है |

पुराना मरीज डाक्टर के लिये सर दर्द है ।जितनी दवाएं एक नया डाक्टर जानता है उससे ज्यादा तो पुराना मरीज सेवन कर चुका होता है सारी दबाओं के कंटेंट्स उसे याद होते है |इधर डाक्टर ने दबा लिखी उधर मरीज की प्रतिक्रया -सर इसमें तो डायजेपाम है या अल्प्राजोलम है दिन भर उदासी रहेगी ,सर इनमे तो आइब्रूफेन है जी मिचलायेगा |गजब है ,अभी गोली खाई नहीं है केवल पर्चा ही लिखा है और इनका जी मिचलाने लगा | होता है ,कुछ लोग ज्यादा सम्बेदनशील होते है वे पुस्तक या पेपर वगैरा में सब्जी आदि बनाने की रेसिपी पढ़ते है और उसमे पढ़ते है प्याज के बारीक टुकड़े करें ,तो उनकी आँखों में जलन होकर आंसू आने लगते है ।मैंने देखा है एक्स-रे डाक्टर को दिखाने के पहले मरीज सबसे पहले खुद एक्स-रे देख कर उसमे टूटी हड्डी तलाश करने की कोशिश करता है |वो तो यह अच्छा है कि एक्स-रे प्लेट पर नाम लिखा होता है मरीज का ,इसलिए वह प्लेट सीधी ही देखता है |मोडर्न आर्ट में चित्रकार का नाम लिखा होता है उससे ही तो समझ में आता है कि चित्र किधर से सीधा है |

एक और अजीब सरदर्द होता है बाबूजी आफिस से तो गुनगुनाते हुए चले आयेंगे और घर में प्रवेश करते ही ऐसी शकल बना लेंगे जैसे पहाड़ खोद कर आरहे हों ,सर पकड़ लेंगे ,धम्म से कुर्सी पर बैठ जायेंगे बेचारी बीवियां चाय बनाने चल देती है तो कहीं कहीं पर मैडम का सुबह सुबह भयंकर सरदर्द होता है पतिदेव चाय बना कर लाते हैं तब उन्हें दर्द से आराम मिलता है |पुराने ज़माने में तो चाय प्रयुक्त नहीं होती थी इसलिए बुजुर्ग कह गए "प्रभाते कर दर्शनम ""वरना वे भी यही कह जाते प्रभाते कप दर्शनम |

क़ानून का जानकार फरीक वकील के लिए सर दर्द होता है |जिन कामों को आमतौर पर वकील के मुंशी करते है वह काम यह स्वम फरीक ही निबटाना चाहता है मसलन नक़ल की दरखास्त लगाना ,रिकार्ड रूम से फाइल निकलवाना ,तारीख पेशी बढ़वाना और ये होशियारचंद समझते है कि मुंशी के पैसे बचा लिए ,जबकि तीन गुना राशि खर्च कर चुके होते है | मुकदमा और मकान बनबाना इनसे जिन लोगों का वास्ता पढ़ा है उनके सरदर्द का तो कुछ पूछो ही मत | चौबीस घंटे मकान का नक्षा ही दिमाग में घूमता रहता है |और कारीगर इतना कम एस्टीमेट बतलायेंगे कि आदमी झट व्यवस्था करले | और ऐसे मुकाम पर लाकर छोड़ते है कि फिर रकम बेचना पढ़े ,कर्ज लेना पड़े मकान तो पूरा करवाना ही है वरना बरसात आगई सब किया कराया बेकार हो जाएगा |

पुराना बाबू नए अधिकारी के लिए सर दर्द होता है ,ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यबाही करना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना जैसा है इसलिए वह दर्द निवारक गोली खाना ज्यादा उचित समझता है |,एक अधिकारी ड्रायवर से नाराज रहते थे ,टूर पर जाते समय घने जंगल में जीप विगाड दी ।इसीलिये कहा गया है कि जब तक पार न लग जाओ नाव वाले से झगड़ा नहीं करना चाहिए |गिरधर की कुंडलियों में हमें मिलता है किन किन से आपको बैर नहीं करना चाहिए |""बामन ,बनियां, वैध्य, आपको तपे रसोई आदि चौदह लोंगों से "" मै कहता हूँ भैया किसी से तो मत करो बैर ।

19 comments:

Babli said...

बहुत बढ़िया लगा! उम्दा प्रस्तुती! बधाई!

अभिषेक ओझा said...

चौरासी की महिमा और मॉडर्न आर्ट की बात... 'प्रभाते कप दर्शनम' पर तो छा ही गए. और इस चक्कर में हम अपना सर दर्द भूल गए :)

अल्पना वर्मा said...

दर्द चौरासी प्रकार के होते है !!!!!!!
इतनी तरह के सर दर्द!मेरे ख्याल से शरीर में जितनी मांसपेशियां उतनी तरह के दर्द तो होने चाहिये!
पेपर पर लिखी रेसिपी में प्याज कटना लिखा होने पर ही आंसू वाली बात पर बहुत हंसी आई.
'एक्स-रे प्लेट पर नाम लिखा होता है मरीज का ,इसलिए वह प्लेट सीधी ही देखता है '
****बड़ा ही सूक्ष्म अवलोकन है!
--दिल के टुकड़े हज़ार हुए!........हा हा हा!
---***'बाबूजी आफिस से तो गुनगुनाते हुए चले आयेंगे और घर में प्रवेश करते ही ऐसी शकल बना लेंगे जैसे पहाड़ खोद कर आरहे हों ,सर पकड़ लेंगे ,
धम्म से कुर्सी पर बैठ जायेंगे'
--आप तो जबरदस्त व्यंग्य लिखे हैं आज..बहुत ही मज़ेदार!
बैर न करने वाली सलाह ,,,,,,कोई खुद से बैर करे तो उसे क्या कहेंगे?

अल्पना वर्मा said...

[contd..]उसका इलाज़ ढूंढना भी एक सर दर्द हुआ न??

श्याम कोरी 'उदय' said...

..... बहुत खूब, कुछ खास तरह के दर्द हैं ये जो आसानी से मिटते नहीं हैं, प्रसंशनीय अभिव्यक्ति, बधाई!!!!!

kshama said...

Ha,ha,! Mujhe ardh sheeshee ka bhayank dard hota hai...lekin majal ki kisiko batane ki himmat karun! Upay jo su lene padte hain, banisbat dard bhala!

JHAROKHA said...

आदरणीय सर, आपके बताये अनुसार मैंने अपनी रचना में संशोधन कर लिया है---उम्मीद है आगे भी आप मुझे ऐसी त्रुटियों से अवगत करवाते रहेंगे--------आपने दर्द को लेकर बहुत खूबसूरत व्यन्ग्य लेख प्रस्तुत किया---आपके व्यंग्य आदरणीय परसाई जी,और शरद जोशी जी का स्मरण करा देते हैं।शुभकामनाओं के साथ। पूनम

रचना दीक्षित said...

सर बहुत अच्छा लगा ये दर्द पुराण. सुक्ष्मावलोकन की दाद दूंगी.हर बात सोलह आने सच.हर बात तो चौरासी या चौरासी लाख पर रुक जाती है काश कुछ बातें ग्यारह पर रुक जातीं जैसे दुश्मन, झूठ वगैरह. ग्यारह का भी उतना ही महत्व है.पर कब समझेंगे हम
आभार

Amitraghat said...

शानदार व्यंग हर पैराग्राफ में मज़ा आ गया...."

बेचैन आत्मा said...

अत्यधिक रोचक पोस्ट। सरदर्द के साथ घर आया था इसे डरते-डरते पढ़ा अभी मन प्रसन्न है कोई सरदर्द नहीं।
कुछ उदाहरण काफी रोचक हैं---
एक दिन से वे एक पेंचकस लेकर आये बोले इसे आप रखलें ,पूछा क्यों ? तो बोले मै अपने सारे औजार एक ही जगह रखना पसंद करता हूँ |
या फिर यह वाला---
मैंने देखा है एक्स-रे डाक्टर को दिखाने के पहले मरीज सबसे पहले खुद एक्स-रे देख कर उसमे टूटी हड्डी तलाश करने की कोशिश करता है |वो तो यह अच्छा है कि एक्स-रे प्लेट पर नाम लिखा होता है मरीज का ,इसलिए वह प्लेट सीधी ही देखता है |मोडर्न आर्ट में चित्रकार का नाम लिखा होता है उससे ही तो समझ में आता है कि चित्र किधर से सीधा है |
--फुर्सत निकालकर और पोस्ट भी पढ़ूंगा।

ज्योति सिंह said...

itne dard ka varnan kar daala kamaal hai ,maja aata raha padhne me aur bahut kuchh samjhte bhi rahe ,sar dard ke baare me kya kahe ,har koi juda hai isse .

दिगम्बर नासवा said...

आपकी दर्दे-दास्ताँ बहुत कमाल की है बृजमोहन जी ....
किसी का सुख दूसरे के लिए दर्द ही होता है .... वैसे बुढापा भी अपने आप में जिस्म, हड्डियाँ के साथ साथ पूरा ही दर्द होता है ... आपकी कलम घुमते घुमते बहुत से पढाव छूती है पर विषय से पकड़ नहीं हटती आपकी ....

ज्योति सिंह said...

aapki ye rachna achchhi lagi rahi is karan aaj bhi padhne aa gayi .

KAVITA RAWAT said...

Alpna ji ne mere man ki baat likh dee.... dard ka koi ant nahi, chahey saaririk ho ya mansik lekin har kisi ko dard to rahta hi hai.. iske baabjood jab hum kisi ka dard samjhte hain to apna dard kuch pal hi sahi door to hota hai.....
Bahut achha vyang..
Bahut shubhkamnayne....

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुन्दर..गज़ब का प्रवाह है आपके लेखन में.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

सीना-ए-चर्ख में हर अख्तर अगर दिल है तो क्या
एक दिल होता मगर दर्द के काबिल होता।
(सीना-ए-चर्ख में- आकाश की छाती में, अख्तर -सितारा)
यहां तो दर्द ही दर्द है। 84 प्रकार के दर्द। जितनी लाख योनियां उतने दर्द। वो एक गाना है- दर्दे दिल, दर्दे ज़िगर, दिल में बसाया आपने.., बसाया है तो भोगो दर्द। सब माजरा इस बसाने में ही है। दिमाग में टेंशन बसा है तो सिरदर्द। पेट में खाना बसा है तो गैस का दर्द। शरीर है तो दर्द है। व्यंग्य में दर्द का ज़िक्र ऐसा जो मुस्कुराहट में बदल जाता है। बहुत खूब भाईसाहब। आपको पढना मज़ेदार होता है। सोचता हूं मिलना कितना बेमिसाल होगा??

सतीश सक्सेना said...

हमेशा की तरह दिलचस्प है यह दर्दे दास्तान ! शुभकामनायें भाई जी !

sandhyagupta said...

Aajkal aise vyangya likhe jate hain ki padh kar sardard ho jaye,par aap to ise mita dete hain.

रंजना said...

ओह...लाजवाब दर्द कथा बांची आपने....
हर वाक्य के संग हास्य फुहार में मन भींगता गया....
इतना रस ,आनंद प्रदान करने हेतु बहुत बहुत आभार..