Thursday, January 15, 2009

कोशिश -ऐ हाइकू

(१)
एक दिन कहने लगीं मै ही मिलती हूँ तुमसे लड़ने दफ्तर का गुस्सा उतरने


प्रेम तुमसे
लडूं किसी और से
कहाँ की तुक
(२)
जब कविता समझ में न आई तो लिख दिया बहुत सुंदर

कमेंट लिखा
बहुत ही सुंदर
कविता या मैं

(३)
मै तो बिचारा दफ्तर गया था अटाला खरीदने वाला गली में मेरे मकान के आगे अटाला ,कबाडा ,व्यर्थ ,बेकार ,अनुपयोगी आउट डेटेड ,पुरानी .जीर्णशीर्ण ,जराजीर्ण ,फालतू चीज़ें खरीदने आवाज़ लगा रहा था

कबाडे वाला
दफतर गये हैं
कल आजाना
(4)
दुर्बल काया के कारण हमेशा हीन भावना से ग्रस्त रहा इसलिए

फोटो खिचाओ
हाथी पे शीर्षासन
उल्टा दिखाओ

(५)
मेरे पूर्वज गरीब दयनीय रहे अब मैं सम्रद्ध हूँ

फोटो बनवा
किसी महाराज का
दादाजी बता
(६)
शिक्षा के महत्त्व से भला किसको इनकार है


पी एच डी को
ससपेंड करते
लगा अंगूठा

18 comments:

रश्मि प्रभा said...

ek-se badhakar ek......har chhand ka apna mazaa hai,par bich me antraal kyun hain

विनय said...

बहुत बढ़िया
तकनीकि ब्लाग पर टिप्पणी करने के लिए जहाँ टिप्पणियों की संख्या दिखाता है वहां चटका लगाये तो पोस्ट के नीचे टिप्प्णी कालम दिखने लगेगा, ऐसा तो सामान्यता होता है, नहीं तो लेख के नाम पर चटका लगा सकते हैं
---
आप भारतीय हैं तो अपने ब्लॉग पर तिरंगा लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

अभिषेक ओझा said...

'पी एच डी को
ससपेंड करते
लगा अंगूठा '

ये करारा !

शाश्‍वत शेखर said...

बहुत दिनों बाद दिखे? सब चंगा ना?
१.) भाई हम भी यही मानते हैं, "लोग" नही मानते!!
२.) अजी आप तो सुंदर हैं ही, हर बार कहना अच्छा नही लगता इसलिए पोस्ट को सुंदर कह लेते हैं!!
३.) हा हा ये अच्छी बात पकड़ी आपने|
४.) नो कॉमेंट्स!
५.) बढ़िया युक्ति है|!
६.) चाँद शब्दों में इतना करार तमाचा पहले नही देखा|

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" said...

brij mohan ji
namaskaar
haikoo achche ban pade hain
- vijay

अल्पना वर्मा said...

फोटो बनवा
किसी महाराज का
दादाजी बता

-bahut अच्छा हाइकु है.
-तीखापन लिए हुए.

-सभी हाइकु अच्छे हैं.

Vinod Srivastava said...

आदरणीय बृजमोहन जी , आपके हाइकू नंबर १.,२, ३ और ६ की प्रतिक्रिया में मेरा प्रथम हाइकू प्रयास
१.
प्रेम मुझसे,
फिर लडाई क्यों?
बताओ जरा?
२.
लो लिख दिया,
कविता है सुंदर,
तूं भी सुंदर.
३.
मनी आर्डर !
आओ डाकिया बाबू,
घर पर हूँ
६.
हूँ अनपढ़,
ससपेंड करूंगा
मै नेता जो हूँ

विनोद श्रीवास्तव

विनीता यशस्वी said...

Aap to kafi lambe samay ke baad dikhe. aur kya khub dikhe.

bahut achha

hem pandey said...

प्रेमिका, ब्लोगर और नेता सबको लपेटने के लिए और चेहरे पर मुस्कराहट ला देने के लिए साधुवाद.

प्रदीप मानोरिया said...

सुंदर हाइकू कवितायें तीखे व्यंग मज़ा आ गया श्रीवास्तव जी धन्यबाद
Pradeep Manoria
http://manoria.blogspot.com
http://kundkundkahan.blogspot.com

creativekona said...

Bahut teekhee mar kar rahe hain apke haiku.Lekin target kaun hain?
Ap ya shreematee ji....
Badhiya haiku. badhai.
Hemant Kumar

राजीव करूणानिधि said...

क्या खूब कही है. मजेदार.

sandhyagupta said...

Hamesha ki tarah tikhi..

Vijay Kumar said...

बृज मोहन जी मेरे मित्र विनोद जी ने कम अधूरा छोड़ दिया था ,पूरा कर रहा हूँ .
४.केवल फोटो ही दिखानी है तो ये भी चलेगा .........
मुंडी अपनी
आमिर के धड पे
क्या फोटो है !.
५ वही फोटो चलेगा ,बस ये कहिये ...........
मेरे दादाजी
दीन की भूमिका में
क्या एक्टर थे !

shyam kori 'uday' said...

... बहुत सुन्दर , मजा आ गया।

मनुज मेहता said...

wah brij ji wah
kya khoob likha hai, satik aur mazedaar. shabdon ke arth bahut hi sahi.

divy kamaldhwaj said...

very impressive

NEETA said...

प्रेम तुमसे
लडूं किसी और से
कहाँ की तुक
is baar to ek se badh k ek hayku taiyar ki hai ....maja aa gaya...udasi our tanav me 2 pal hansana to hua.......really ...badhayee ho........