Monday, November 8, 2010

चमत्कार

चमत्कारों से अपरिचित लोग उन्हे कई नामों से से सम्बोधित करते है तथा कई दफे बहुत वारीकी से देखने के वाद भी कोई चीज समझ में नहीं आती तो उसे हाथ की सफाई, जादू, कालाजादू, मेस्मेरेजम, नजर बांधना, ट्रिक फोटोग्राफी कैमिकल्स का सम्मिश्रण आदि इत्यादि कह दिया जाता है - लेकिन चमत्कार वह होता है जिसे सभी प्रकार के लोग देखे भी और माने भी । मंत्र की शक्ति का तो पता नहीं मगर मंत्री में राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति जरुर होती है। मैने देखा है मंदिरों में ज्यादातर भगवान की मूर्तिया खडी निर्मित की जाती है ।मैने एक पुजारी से पूछा यार तुम्हारे भगवान हमेशा खडे क्यों रहते है उसने बडी सादगी से कहा वो क्या है साहब इधर मंत्री वगैरह आते रहते है '

।मुझे पता नहीं कि मंत्र में इतनी शक्ति होती है या नही कि वह किसी चलती हुई मशीनरी को रोकदे।

ट्रेन जब स्टेशन से रवाना होने को हुई तो एक लंगोट धारी ??-उसमें प्रविष्ठ हुये । रेल में सफर करने वाले जानते है कि यात्रियों के टिकिट की चैकिंग कभी स्टेशन पर खडी गाडी में नहीं होती है -चलती गाडी में होती है क्योंकि एक तो लोग चढ उतर रहे होते है दूसरे कोई स्टेशन पर उतर कर सह सकता है कि मै बैठा ही न था। चलती गाडी में बिना टिकिट यात्री चैकर के पूर्णरुपेण वश में हो जाता है चलती ट्रेन में से उतर न सकने के कारण उसे चेकर की मन की मुराद पूरी करना पडती है। मगर उस दिन जो नहीं होता वह हुआ चेकिंग स्टेशन पर खडी गाडी में हुआ । चेकर को आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास था कि ??के पास टिकिट नहीं है और वास्तव में होता भी नहीं है। दो तीन मिनट रहगये थे गाडी रवाना होने में कि चैकर और ??में झगडा होगया ।चैकर अपनी जिद पर अडा था कि टिकिट लेना होगा और वे एक विशेष प्रकार की गाली जो आम तौर पर ये लोग उच्चारित करते हैं उच्चारित करते हुये कह रहे थे हमसे टिकिट मांगता है। बात में दम हो या न हो मगर आवाज में दम थी ।बात वढना थी सो बढ गई। ??रेल से स्टेशन पर उतर आये और जोरदार आवाज में कहा अब तू गाडी लेजाकर बतलादे ।

अब देखिये जनाब कि गार्ड हरी झंडी दिखा रहा है ट्रेन जोरदार शीटी की आवाज निकालती है स्टार्ट होती है और थोडा हिल डुल कर फिर रुक जाती है। उस में विभिन्न जाति, सम्प्रदाय के लोग थे -परम आस्तिक और घोर नास्तिक भी थे। मन्त्र शक्ति में विश्वास करने वाले और उनके विरोधी वैज्ञानिक भी उस गाडी में सवार थे । ट्रेन की आधी सवारी स्टेशन पर उतर आई थी । लोग आग्रह कर रहे थे कि चैकर माफी मांगले । मगर वह भी पक्का गवर्नमेन्ट सरवेन्ट था माफी क्यों मांगू मैं अपनी डयूटी देरहा हूं उसे तनखा इसी बात की मिलती है डयूटी न करुं तो सरकार तनखा देती है और करुं तो मजबूर यात्री और शौकिया यात्री सरकार से भी ज्यादा देते है। ड्राईवर ने हाथ जोडे भैया मांगले माफी क्या विगडता है गाडी लेट होरही है गार्ड ने हाथ जोडे मगर जिद यह कि इसने टिकिट मांगा तो क्यों मांगा । भीड व्दारा अनुनय विनय करने के बाद बमुश्किल-तमाम चैकर ने चरणों में गिर कर माफी मांगी ।और देखते देखते गाडी थोडी हिलडुल कर स्टार्ट होगई । ?? की जयकारे की आवाज गूंजने लगीं ।
स्टेशन के पास ही शासकीय रिक्त पडी भूमि पर पहले कुटिया बनी फिर विशालकाय भवन, धर्मशालायें बनी ।लोगों की श्रध्दा धन के रुप में प्रकट हुई जो जितना श्रध्दावान था उसने उतना ही चढावा चढाया और सिलसिला सतत जारी रहा। अब ?? करोडों में खेल रहे है और बेचारे रेल के ड्राईवर गार्ड और चैकर को मात्र एक-एक लाख रुपये में ही संतुष्ट कर दिया गया

22 comments:

kshama said...

Kamaal hai! Is pe kya comment kiya jaye? Kaash ye chamatkaar dikhane wale log kuchh jan kalyan kaa chamatkaar dikha den!

vijai Rajbali Mathur said...

Darasal yeh chamatkaar nahin ,Mantr bhee nahin ,keval Tantr ka DURUPYOG hai.Aise logon se jan -kalyaan ki apechha karna vyarth hai .Aise hee dohngion -pakhandiyon ka virodh aur janta ko aagah karne ka kaam hamara blogg kar raha hai.
krantiswar.blogspot.com

सोमेश सक्सेना said...

ये अच्छा काम कर रहे हैं आप जो अपने ब्लॉग के माध्यम से ऐसे चमत्कारोँ की पोल खोल रहे हैं।

बधाई :-)

Satish Saxena said...

इस पर भरोसा नहीं हुआ भाई जी ! यह एक दंतकथा लग रही है जो अक्सर बाबा के मठों के साथ जुडी रहती हैं !

Abhishek Ojha said...

बहुत नाइंसाफी है. बस एक-एक लाख !

पूनम श्रीवास्तव said...

aadarniy sir,
deedawali ke pawan parv ki hardik badhai swikaaren.
aapne jo kuchh bhi lekh me likha hai vah vatav me satya hai ,fir bhi bahut se log is sachchai ko nakarte hain .aisa kyon hata jo nahi hona chahiye,shayad isi ko mantra -chamatkar kahte hain.
bahut hi sundar prastuti----
poonam

डॉ टी एस दराल said...

बृजमोहन जी यह एक कहानी है या सुनी सुनाई बात ।
वैसे इस पर हमें भी यकीन नहीं हो रहा । दुनिया में चमत्कार कोई नहीं होते ।

BrijmohanShrivastava said...

सतीश जी एवं डाक्टर साहब । बेशक यह काल्पनिक है,। आजकल कल्पनाये ंही साकार होरही है। दन्त कथा भी कह सकते है ।मगर इस मंत्र शक्ति का रहस्य मेरी अन्तिम लाइन में देने की कोशिश की है ,उसमें मै कहां तक सफल हुआ हूं इसका निर्णय आप करेंगे

डॉ टी एस दराल said...

ओह अब समझ में आया । यह मिली भगत थी कुछ कपटियों की ।
वाकई आजकल ऐसा ही होता है और भोली भाली जनता बेवक़ूफ़ बन जाती है ।

बढ़िया कटाक्ष ।

Satish Saxena said...

वाकई बड़े भाई ! आखिरी लाइने पढी ही नहीं थी और पढ़ीं भी होंगी तो ध्यान नहीं दिया मैं बड़े भाई द्वारा आँखे खोलने के लिए आभारी हूँ !
आदर सहित आपका

प्रेम सरोवर said...

Jab hamare jivan mein koi ek apratyasit ghatna ghat jati hai to ham use ishvariya Chamatkar kahte hain.Manushya ke Chamatkar vidhata ke chamatkar ke sath bilkul bhinn hain-Dil ko bahalane ka achha khyal hai. Good Morhing.

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

बहुत ही धारदार व्‍यंग्‍य। हार्दिक बधाई।

Alpana Verma said...

'मगर मंत्री में राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति जरुर होती है।'
सही कटाक्ष है.

****लेख में किया गया व्यंग्य भी बहुत खूब किया है ...''?? ''जैसे लोग ही दीमक बने हुए हैं और देश ही नहीं जनता को भी खा रहे हैं.

कविता रावत said...

jabardast vyang... bahut achha laga..aabhar

vandan gupta said...

मुझे तो ये मिलीभगत दिख रही है उन महाशय और चैकर की………………वैसे यही होता है सभी जगह्।

रचना दीक्षित said...

.......ये सिर्फ एक कहानी है या सच ???? दिल पर बहुत गहरी चोट कर गया.

Smart Indian said...

चमत्कार को नमस्कार! आपकी स्थापित शैली से थोडा सा हट के है। वैसे दो लाख दिया तो ऐडवांस ही है न, काफी है।

रचना दीक्षित said...

मेरे ब्लॉग पर मेरी कविता का कविता से भी अच्छा विश्लेषण करने के लिए आभार ई मेल मालूम न होने के कारण मजबूरन यहाँ लिख रही हूँ आगे भी मार्ग दर्शन करते रहें आभार

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

हा हा हा......
स्वाद आ गया!
आशीष
--
पहला ख़ुमार और फिर उतरा बुखार!!!

ZEAL said...

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जबरदस्त व्यंग ! देश को खोखला कर रहे नेताओं और करोड़पतियों को बेनकाब करती एक शानदार प्रस्तुति। ऐसे चमत्कार इसलिए काम कर रहे हैं क्यूंकि भेडचाल जनता अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना ही नहीं चाहती ।
जब तक मुर्ख बनने वाले होंगे , दुष्टों का पलड़ा भारी ही रहेगा !

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रंजना said...

सत्य कहा...कलयुग में शक्ति मंत्र में नहीं मंत्री में होती है,उसे साध लो तो दुनिया मुट्ठी में...

देवेन्द्र पाण्डेय said...

यह भी खूब।