Tuesday, September 22, 2009

क्या मैंने गलत कहा ?

कभी कभी सोचता हूँ मुझे नहीं कहना चाहिए था , फिर विचार आता है कि कह दिया तो कह दिया , उस वक्त परिस्थिति ही कुछ ऐसी थी ,आगया कहने में , फिर सोचता हूँ , ऐसा न हो कि उनकी भविष्य की जिन्दगी बर्वाद होजाय , फिर सोचता हूँ , हो जाये तो हो जाये वैसे कौनसी आबाद है यद्यपि कह कर मैंने अपनी मानसिक उलझनें बढा ली हैं =दर-असल बात यह थी कि =
एक युवती ( पत्नी ) आयु लगभग ३५ -३६ ,जमीन पर अधलेटी अवस्था में , पति के क्रोधी स्वाभाव से परिचित , रो - रो कर कह रही थी आज मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगी तुम मुझे मार डालोगे स्थान पत्नी का मायका , पति एक हाथ से पत्नी के बाल पकडे हुए दूसरे , हाथ से कभी गला दबाता ,कभी चेहरा दबाता और कभी थप्पड़ मारता ,पत्नी गिडगिडा रही थी , तुम रोज़ मुझे कमरे में बंद करके मारते हो ,मैंने मायके में अभी तक नहीं बताया, आज तुम मुझे यही मार रहे हो ,एक दो दिन बाद चली चलूंगी ,आज तुम बहुत गुस्से में हो , चली तो तुम रस्ते में ही मार कर फैंक दोगे
लोकलाज भी क्या चीज है ,बुढिया माँ और बूढा बाप चुप-चाप हैं ,यह और कोशिश कर रहे हैं कि बाहर मोहल्ले का कोई सुन न ले खैर
तो मैंने उससे कहा
तुझे मार डालेगा !अरे तू जिन्दा ही कब है जो तुझे मार डालेगा मुर्दों को नहीं मारा जाता मगर तू तो फिल्म क्रांतिबीर के नाना पाटेकर की डायलोग बनी हुई है ""भगवान् ने हाथ दिए लगे फैलाने ,मुह दिया लगे गिडगिडाने "" क्या तुम्हे तंदूर में फिकने ,मार खाने , रसोई गेस दुर्घटना में मरने हेतु हाथ ,पाँव ,नाखून ,दांत देकर भेजा गया है
तू कहती है तुझे कमरे में दरवाज़ा बंद करके मारता है दीवार फिल्म नहीं देखी क्या ? एक बार तू बनजा अमिताभ ,दरवाज़ा बंद कर ,सांकल चडा , ताला लगा और चाभी फैंक कर कह ""पीटर ले ये चाभी , तेरी जेब में रखले ,अब मैं तेरी जेब से चाभी निकाल कर ही ताला खोलूंगी
अरी शोषित उपेक्षित ,, तुझसे तो ’चालबाज ’' की श्रीदेवी अच्छी ,मालूम है उसने अनुपमखैर से क्या कहा था " ले त्रिभुवन ये चूडी पहनले ,कल तक तेरे हाथ में चाबुक था और मेरे हाथ में चूडियाँ आज मेरे हाथ में चाबुक है , ले पहिन चूडियाँ
फिर ये तो देख तुझे मार कौन रहा है ? तुझ पर हाथ कौन उठा रहा है ? मालूम है ‘आन ‘ में शत्रुघ्नसिन्हा ने जैकी श्राफ से क्या कहा था ?" सुन बालिया औरत पर हाथ उठाना नामर्द की पहली निशानी है" देखले जीना है तो जी , वरना रोज रोज मरने से एक दिन मर ही जा मगर ऐसे मरना की कम से कम चार महिलाओं को जीने का मार्ग बतला जाना
मैंने सुना है
श्रीमानजी की शादी हुई पहले ही दिन यानी पहली ही रात जैसे ही नवबधु ने घूंघट उठाया ,गाल पर एक जोरदार थप्पड़ ,बधू रुआंसी होकर बोली ""कईं अन्नदाता की भयो ,म्हार से कुणसी गलती हो गई ""बोले -यह तो बिना कोई गलती किये का है ,गलती की तो फिर समझ लेना


एक बात मेरी समझ में नहीं आती कि कहते है चींटी भी दब जाने पर काट लेती है ,लेकिन ये विशिष्ठ ऐतिहासिक परंपरा न जाने कब से चली आ रही है अब इस ऐतिहासिक बर्बरता और हिंसा के लिए किसे दोष दिया जाय वैसे तो हम कहते फिरते हैं दूसरों के साथ वह व्यबहार न करो जो अपने लिए पसंद न हो बिदुर जी ने भी कहा ""आत्म प्रतिकूलानि परेशां न समाचरेत "" बाइबिल में कहा गया ""डू नोट डू अन्टू अदर्स ""सिकंदर ने पुरु से राजाओ जैसा व्यव्हार किया आज भी एक मंत्री पूर्व मंत्री से राजाओ जैसा व्यव्हार करता है किन्तु स्त्री ! वह तो अपनी है , दूसरों के साथ अच्छा व्यव्हार करने की बात कही गई है
ये माना की कई लोग ऐसे भी होते है वे किसी से ही सद्व्यवहार नहीं करते है पत्नी बेटा पडौसी कोई भी हो
मैंने सुना है
एक श्रीमानजी एक दिन प्रात :काल बरामदे में बैठे किसी किताब में तल्लीन थे ,उनके परिचित निकले पूछा कहिये किव्ला क्या हो रहा है ?तल्लीनता में व्यवधान !क्रोध आगया आजाता है ,शंकरजी को भी कामदेव के ऊपर आगया था ,राम ने भी "अस कही रघुपति चाप चडावा "" तो इनको भी आगया , बोले तेरा सर हो रहा है, दिखाई नहीं देता किताब पढ़ रहा हूँ कौन सी किताब पढ़ रहे हो ? एक तो व्यवधान ऊपर से जिरह यानी कूट परीक्षण यानी क्रोस एक्जामिनेशन बोले तू नहीं समझेगा यार तू जा फिर भी हुज़ूर ? क्रोध की सीमा पार ""व्यवहार शास्त्र " पढ़ रहा हूँ तेरे बाप ने भी इस किताब का नाम सुना है ?
मेरा आशय केवल मात्र इतना है की कभी कभी मुंह लगने पर भी आदमी का क्रोध बढ़ जाता है और वह अपना आपा खो देता है लेकिन हमेशा ही तनाव में या क्रोधित रहना कि पत्नी घर में अशांति और बैचेनी महसूस करे ,एक अज्ञात भय और असुरक्षा की भावना उसमे रहे ऐसा तो नहीं होना चाहिए इसीलिये मैंने उपरोक्त बात कह दी थी ,वरना मेरा आशय घरों में अशांति फैलाने का नहीं था

Sunday, September 20, 2009

कृपया मार्गदर्शन करें

मेरे साथ बड़ी दिक्कत होगई ,मैं कम्प्यूटर में कुछ जानता नहीं और इन्टरनेट की साइड खुलना बंद हो गई ,कम्प्यूटर इन्टरनेट कनेक्ट बतलाता था - मैं जहाँ इस वक्त हूँ वहां कोई जानकार भी नहीं है झालावाड राजस्थान जिले की छोटी सी तहसील पिरावा , केवल एक दुकान ,तो मैंने उन्हें जाकर प्रॉब्लम बतलाई ,बोले ठीक कर दूंगा ,वे आये और डब्बा (सी पी यूं ) उठाकर ले गए ,दूसरे दिन वापस इन्टरनेट भी कनेक्ट और साइड भी खुलने लगी

वे चतुर सुजान बोले ,मैंने फोर्मेट कर दिया है ,मुझे क्या पता ये क्या होता है मैंने सोचा अब कोई लेख लिख डालें पहले मैंने गुलाम अली साहिब की ग़ज़ल सुनना चाही जो मेरे कंप्यूटर में थी ,जैसे ही ग़ज़ल सुनना चाही मीडिया प्लेयर पर सन्देश आया……not be a sound device installed or it may not bhee functioning properly मैंने सोचा मत सुनो ,कुछ लिखें , गूगल का ट्रांसलेशन खोल कर कुछ लिखा और जैसे ही मैं अपने डाक्यूमेंट पर लेगया तो वहां हर शब्द की जगह चोकोर डब्बे जैसे कुछ बन गए कुछ इस तरह के ()()()()()()( गोल नहीं बल्कि चौकोर )

अब इतनी क्षमता तो है नहीं कि डायरेक्ट ब्लॉग पर लिखदूं ,पहले तो डाक्यूमेंट पर सेव कर दुरुस्ती करता था फिर सोचा लेख न सही टिप्पणी ही सही ,कुछ ब्लॉग खोले तो ब्लॉग तो खुले लेकिन लेख या रचना की जगह वही ०००००००००० अब क्या तो पढू और क्या टिप्पणी करूं ,भाई मेरे कंप्यूटर का फॉण्ट उन चतुर सुजान ने फोर्मेट करके गायब कर दिया तो ,तो क्या हुआ दूसरे के कंप्यूटर में तो होगा ,डायरेक्ट टिप्पणी लिख दूंगा मगर नहीं तो मुझे एक किस्सा याद आगया

एक पटेल थे अंधे ,पास के गाव में समधी के यहाँ गए ,बातें करते खाना खाते अँधेरा हो गया , पटेल ने कहा अब चलें , समधी ने कहा लालटेन ले जाओ पटेल पटेल ने कहा क्यों मजाक उडाते हो ,हमें लालटेन से क्या मतलब है ,समधी ने कहा ये बात नहीं अँधेरे में तुमसे कोई टकरा न जाये इसलिए खैर पटेल लालटेन लेकर चल पड़े ,लेकिन वही हुआ ,"रास्ते में उनसे मुलाकात हुई , जिससे डरते थे वही बात हुई "" एक सज्जन रस्ते में पटेल से टकरा गए पटेल ने कहा भैया हम तो जानमान अंधे हैं पर तुमऊ का अंधे हौ जो हमनते टकरा रहे हौ - बोले दादा माफ़ करियो अँधेरे में कछू सूझो नाय पटेल ने कहा जई वास्ते तो हम लालटेन लै कै आए हते , सज्जन ने कहा तौ दादा लालटेन जला तो लेते

खैर सा'ब, वे चतुर सुजान तो एक दिन एक सी डी लेकर आये और ७०-८० फॉण्ट डाल गए मगर मेरी समस्या बरक़रार है मैं साहित्य पढने से वंचित हो रहा हूँ साथ ही टिप्पणी करने से भी ,कृपया कोई सरल सी तरकीब बतलादें ,ताकि में ब्लॉग पढ़ सकूं एक बात और किसी किसी ब्लॉग में यह दिक्कत नहीं भी आरही किन्तु ज्यादातर ब्लॉग पढने में आरही है

Sunday, September 13, 2009

पापा कहते हैं

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा, एक ने गाया, तो दूसरा गाने लगा डैडी मेरा बड़ा परेशान बेटा बड़ा होकर नाम करे कहीं इसीलिये पिता की सम्बेदना या भावना ,इच्छा ,विचार ,चिंता इस मायने में कि- चाहे वह स्वम बाबू या मास्टर हो लेकिन लड़के को कलेक्टर बनाने की सोचता है ,चपरासी है मगर लडकी के लिए इंजिनियर बर ढूंढ़ना चाहता है , लड़के द्वारा की गई बदतमीजियों पर दूसरों से माफी मांगता रहता है और लडकी के ससुर और लडकी के पति के चरणों में झुक कर बार बार गलतियों की क्षमा प्रार्थना करता रहता है लडकी की शादी में अपनी सारी जमा पूंजी निकाल लेता है और लड़के की अच्छी नौकरी के लिए अपना मकान बेच कर किराये के मकान में रहने लगता है {{यहाँ अच्छी नौकरी के लिए मकान बेचना इससे मेरा तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि रिश्वत देना होती है वो तो क्या है, की कुछ लोग ऐसा धंधा ही करते है ,बेवकूफ बना कर पैसे लेलेते है इस शर्त पर की सेलेक्ट नहीं हुआ तो पैसे वापस

यदि सिलेक्शन म्हणत ,योग्यता अथवा इत्तेफाकन हो जाता है तो उसके पैसे रख लेते है वाकी न होने वालों के पैसे ईमानदारी से वापस कर देते है ,हां कुछ म्हणताना जरूर खा लेते है और वापस पाने वाले को थोडा नुक्सान अखरता भी नहीं है क्योंकि कहावत है " सब धन जातो देख के आधो लीजे बाँट " और भागते भूत की ........." और फिर ये पैसे बहुत अवधि बाद किश्तों में पटाते है क्योंकि अलग अलग फिक्स डिपॉजिट कर देते है व्याज ये खा जाते हैं ,मूल में से कुछ काट कर पक्षकार को वापस कर देते है पक्षकार कोई कोर्ट कचहरी में ही नहीं होते ,

जो आने वाली भोर से डर कर रातें जाग जाग कर काटे वह पिता , ,,,,,,,,,पापा , से डेड हुआ डैडी धरती पर परेशान होने के लिए ही अवातारित

होता है बच्चों की सम्बेदन-शीलता इस मायने में कि उपलब्ध कम मालूम पड़ता हो तो उसकी वजह है डैडी ,दूसरों के पास हम से अधिक सुख सुविधाएँ हैं तो उसका कारण हैं पापा , बेटा कहा रहा था पापा यदि आपने जिन्दगी में किसी नेता की चमचागिरी ही की होती तो आज हमें यूं बेरोजगारी का मुहं नहीं देखना पड़ता आपने हमें महंगे स्कूल में नहीं पढाया , अरे अपने सस्ते ज़माने में दो चार प्लाट ही नगर में लेकर पटक दिए होते

वैसे कहा तो यह जाता है कि There is a woman behind every successful man मगर आज यह कहना विल्कुल सही है कि हर सफल व्यक्ति के पीछे उसका पापा होता है फिर चाहे वह फिल्म नीती हो या राजनीती कुछ डैडी अपने बेटे को कठिन परिश्रम की सलाह देते हैं तो कुछ कहते हैं कि = माना कि कठिन परिश्रम से आज तक कोई नहीं मरा फिर भी रिस्क क्यों ली जाये

मेरी नज़र में ""डैडी या पापा वह ,जो सबकी चिंता करे मगर उनकी चिंता कोई न करे""मैं एक विचार -धारा से परिचित हुआ आज की पीढी के विचार ""हम भी कुछ पुण्य करके आये हैं जो हम आज सफल हैं ,तुम न पालते तो कोई दूसरा पालता क्योंकि जो जन्म देता है वह उसके जीवन की रक्षा, भोजन पानी सबकी व्यवस्था कर देता है पाला पोषा , पढाया लिखाया , तो सब माँ बाप पढाते लिखाते हैं यह विचार धारा जब बुजुर्ग माता पिता के समक्ष क्रोध या आवेश में प्रकट की जाती होगी तब उस पापा पर क्या गुजरती होगी ?

मुनि श्री तरुण सागर जी ने एक प्रवचन में कहा था कि एक, इकलौता डाक्टर बेटा अपनी माँ का स्वम उपचार कर रहा था जब माँ स्वस्थ हो गई तो बेटे ने दबाओं का बिल माँ को पकडा दिया आज की पीढी को दोष देना भी व्यर्थ है / क्योंकि हो सकता है यह विचार धारा पुरानी रही हो क्योंकि जो शेर मैंने पढा वह भी पुराना ही है ""हम उन किताबों को काबिले जप्ती समझते हैं /कि जिनको पढ़के बेटे बाप को खब्ती समझते हैं ""

Monday, August 31, 2009

रहिये अब ऐसी जगह चलकर

रहिये अब ऐसी जगह चल कर जहाँ मच्छर न हों -पत्नी का यह शायराना अंदाज़ भलेही मुझे अच्छा लगा, किंतु मेरा कहना यह था की जायें तो जायें कहाँ ? उनका कहना यह था की अपने यहाँ जैसे और जितने मच्छर कहीं भी नहीं होंगे, इसलिए मकान या मोहल्ला बदलना ही होगा| मेरा सोच यह है कि शेर -सांप -बिच्छू –मच्छर, आदि से डर कर नहीं वल्कि इंसान -इंसान से डर कर मोहल्लों का परित्याग किया करते हैं |

उनकी परेशानी अस्वाभाविक नही थी -औसत मच्छर से बडे और मक्खी के आकार से कुछ छोटे, आम मच्छर से हट कर यानी ख़ास मच्छर, गोया बहुत ही खतरनाक मच्छर -अगरबत्ती व टीकियों की खुशबू व बदबू को नज़रंदाज़ कर देते है -प्याज काट कर बल्ब के पास लटका दो तो उसके इर्द-गिर्द ऐसे मंडराने लगते हैं जैसे प्याज प्याज न होकर कोई फूल हो और वे स्वयम भँवरे हों - घर में धुआं कर दो तो, वे यथास्थित रहे और आदमी घर से भागने लगे -किसी की आँख में जलन -किसी को आंसू -किसी को छींक -किसी को खांसी | मेरे द्वारा एक दिन धुआं कर देने पर मेरे बीबी बच्चों का मुझ पर नाराज़ हो जाना तो स्वाभाविक था क्यों कि वे मेरे अपने थे , किंतु आश्चर्य बिल्डिंग के अन्य लोग भी नाराज़ नजर आए | दीवालें काली हो रही हैं -कमरों में बैठना मुश्किल है -अजीब किरायेदार आया है -धुआं कितना घातक होता है जानता ही नहीं है -आक्सीजन की कमी हो गयी आदि इत्यादि|

|मच्छरदानी कोई अज़नवी चीज़ नहीं मगर उसके बाबद मेरा सोचना है कि मच्छरदानी -खरीद तो ली मगर इसे बंधोगे कहाँ -अव्वल तो बांस के चार डंडे मिलना मुश्किल , लोहे की रोड लगवाने लायक पलंग नहीं ,दूसरे मकान मालिक दीबारों में कील ठोकने नहीं देगा ,अथवा तो कीलें स्वयम नहीं ठुकेंगी थोडा सा पलस्तर उखाड़ कर टेडी हो जायेंगी और उचट कर ऐसी जगह गिरेंगी की ढूंढते रह जाओगे | और ठोकने वाले का अंगूठा !मरहम पटटी का इंतजाम पहले कर लेना चाहिए |वैसे कायदा तो यह है कि, दीवार में कील ठोको तो कील पत्नी को पकडाओ |

मच्छरदानी बाँध कर सर्ब प्रथम उसके अंदर उपस्थित मच्छरों की समुचित व्यवस्था करने में सब बुद्धिमता विसर्जित हो जाती है | ऐसा मालूम पड़ता है जैसे मच्छर दानी में कोई ताली बजा बजा कर कीर्तन कर रहा हो |इधर ज़ोर की ताली से अपने हाथ लाल, और मच्छर गायब -वह ऊपर मछर दानी के कोने में -और कोने वाले को मारने की कोशिश की तो मच्छर दानी की डोरी टूटी या कील उखडी|चारों तरफ मच्छर दानी गद्दे के नीचे दबाने के बाद समस्या यह की लाईट आफ कैसे करें -लाईट बंद करने गए यानी दो बार मच्छर दानी हटाई और इधर द्रुत वेग से उनकी प्रविष्ठि हुई, फिर रात भर गाते रहिये "जानू जानू री छुपके कौन आया तेरे अंगना " जाली में फंसा वह प्राणी कितना दुर्दांत -खूंखार और आक्रामक हो जाता है -भुक्तभोगी ही जानता है |

पत्नी का यह यह कहना (वह भी गाकर ) कि "नाली बनाने वाले जाने चले जाते हैं कहाँ " और यह भी की " नाली बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई -काहे को नाली बनाई ""और अगर बनवाई तो इसे ढकवाते क्यों नहीं | मैं समझाना चाहता हूँ "तुम सुनहु ग्रह मंत्री स्वरूपा, नाली बनहि बजट अनुरूपा "" और बजट आजायेगा तो ढकवा देंगे| और बजट के अंदर व समय सीमा में कभी काम पूरा होता नहीं है क्यों ?

तो चलो 'फिर दूसरी जगह चलो | मैंने कहा अरे वाह, कल को तुम कहोगी की ऐसी जगह चलो जहाँ हत्या, बलात्कार, चोरी, डकेती, अपहरण, न होते हों |दूसरे नालियों में कचरा सब्जी छिलके तुम डालो ऊपर से शिकायत| इसीलिये तो किसी ने कहा है “”इस आग को कैसे कहें ये घर है हमारा -जिस आग को हम सब ने मिलकर हवा दी है””

Monday, August 17, 2009

भूंख से मरने की नौबत आ ही जाये तो

जब भूंख से मरने की नौबत आ ही जाये तो क्रियाओं और पदार्थों को त्याग कर, बन में चले जाना या निष्क्रिय हो कर समाधिष्ठ योगी बन जाना विकल्प नहीं है क्लेश युक्त जीवन व्यतीत न कर कर्त्तव्य पथ पर चलना आवश्यक है मनुष्य जीवन का लक्ष्य सुख प्राप्त करना है और उसके लिए कर्म आवश्यक है |

एक कहावत है ""जब तक धरती पर एक भी मूर्ख मौजूद है अक्ल्मंन्द भूखों नहीं मर सकता| - ५-५ रुपयों में लकडी के एक एक बालिश्त के टुकड़े बिक जाते हैं, जिनको मात्र घर में रखने से खटमल व मच्छर भाग जाते है, जिनको पुस्तकों की अलमारी में रखने से पुस्तकों को दीमक नहीं लगती है | बाद में मालूम चला उस लकडी को ही दीमक खा गई

आप एक काल्पनिक कम्पनी बनाइये और अखवार में विज्ञापन दीजिये, कि ऐसी कोई चार संख्याएं लिखो जिसका योग २५ हो| कम्पनी का कोई कर्मचारी या संबन्धी इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकेगा प्रथम पुरस्कार पाने वाले को १० हजार रूपये का टीवी सेट दिया जायेगा |आपका उद्देश्य प्रविष्ठी भेजने वाले का नाम और पता जानने भर का होना चाहिए अब जो नाम आपके पास आये हैं उन सभी को पत्र भेजिए कि आपने प्रथम पुरस्कार जीता है | सभी लोग ऐसी संख्याएं लिखेंगे जिनका योग २५ आता है ,किन्तु यदि किसी का योग २३ या २० आता है तो उसे भी सूचना भेजिए कि आपने प्रथम पुरुस्कार जीता है| आप दो हज़ार रूपये भेजिए ताकि आपका मॉल पार्सल से भेजा जा सके अब आपका नैतिक कर्तव्य है कि आप पोस्ट बॉक्स नम्बर पोस्ट बेग नम्बर का मोह त्याग कर मोहल्ला बदल लें राशिः ज्यादा हो तो शहर बदल ले देश में शहर बहुत हैं |

किन्ही वकील साहिब के पास जाइये उनसे कोई कानूनी पुस्तक लीजिये (जमीदारी उन्मूलन अधिनियम ही सही ) और उसे सस्ती सी प्रेस पर हलके से कागज़ पर किताब नुमा आकार दीजिये तथा तांगे या सायकल रिक्शा में बैठ कर भोंपू से प्रचार कीजिए कि सरकार ने कानून बनाया है -जिससे किसानों को लाभ होगा किसानों कि वह जमीने, जिनको वे जोत रहे है, और सरकारी कागजात में उन्ही का नाम दर्ज है, और जो उनकी पुस्तैनी है, अब उन्ही की हो जायेगी |उनकी फसल वे काट व बेच सकेंगे| आपके प्रचार से तारीख पेशी करने आये हाट बाज़ार करने आये किसान दो दो रुपयों में वह किताबें खरीद कर ले जायेंगे और अपने गावं में शिक्षाकर्मियों से पेडों तले शिक्षा ग्रहण करने वाले, होनहारों से पढ़वा कर, फूले नहीं समायेंगे | आप गलत भी नहीं है आप तो कह रहे है सरकार ने कानून बनाया है कब बनाया है यह आप कह ही नहीं रहे हैं

अखवार में विज्ञापन दीजिये कि अत्यंत उपयोगी घरेलू उपकरण के विक्रय हेतु विक्रय प्रतिनिधि नियुक्त करना है बेरोजगार स्मार्ट और वाक्पटु को प्रार्थमिकता दी जायेगी| आजकल अधिकांश युवक बेरोजगार है और जो रोजगार से लगे हुए हैं वे पार्ट टाइम जाव की तलाश में रहते हैं क्योंकि चाय, पान, सिगरेट, गुठका ,सिनेमा ,क्रीम, डियोड्रेंट, महंगे हो जाने से घर का खर्च चलता नहीं है| वैसे भी आज का हर युवक अपने को स्मार्ट समझता है करेला और नीम चडा एक तो बेरोजगार ऊपर से स्मार्ट वाक्पटु तो होगा ही ज्यादा से ज्यादा किसी बुक स्टाल से एक दो रुपया रोज पर उपन्यास या फिल्मी पत्रिका लाकर अपना दिन गुजार देता होगा |

जब आप दस हज़ार रूपये मासिक व कमीशन का लालच देंगे, तो वह आवेदन करेगा फिर उसे आपका जवाब मिलेगा कि हमारी समिति के सदस्यों ने आपकी योग्यता और डिग्री आदि देखते हुए सर्वसम्मति से आपको आपके क्षेत्र का विक्रय प्रतिनिधि चुना है आपका मासिक वेतन दस हज़ार होगा और मॉल विक्रय पर १० प्रतिशत कमीशन मिलेगा|विक्रय ५० हज़ार रूपये मासिक तक बढ़ने पर आप कमीशन २५ प्रतिशत हो जायेगा |फिलहाल २० उपकरण आपके शोरूम को भेजेंगे कम्पनी के नियमानुसार आप १५ हज़ार की नगद जमानत भिजवा दीजिये यह राशिः आपकी अमानत रहेगी और जब आप चाहेगे बापस मांग सकते हैं |

हर गरीब मित्र का एक अमीर मित्र जरूर होता है ,यह परिपाटी कृष्ण सुदामा युग से चली आरही है ,तो ऐसे में आपके भाग्य से और उस युवक के दुर्भाग्य से वह अमीर मित्र उस युवक की जरूर आर्थिक सहायता करेगा इसके बाद आपको क्या करना है ,आप स्वम समझदार हैं

एक स्कीम निकालिए १०० रूपये का मॉल ७५ रूपये में मिलेगा पैसे जमा करवाइए ड्रा निकालिए और १०० का मॉल ७५ में बेच दीजिये |देखिये हर धंधे में थोड़ी रिस्क तो उठानी ही पड़ती है अब आप पर लोगों का विश्वास जमेगा बड़े आयटम निकालिए सोफासेट डबलबेड वाशिंग मशीन इत्यादि इत्यादि ,अब आपकी कम्पनी पर लोगों का इतना विश्वास जमेगा कि शायद भगवन पर भी नहीं | अब आप मोटर सायकल ,कार, हेलीकोप्टर .हवाईजहाज.लेपटोप के पैसे जमा करवाइए और अंतर्ध्यान हो जाइये

पत्राचार का कोर्स कर डाक्टर की डिग्री प्राप्त कीजिये |आपने चाहे प्रदेश का नक्षा तक न देखा हो मगर आपको अमेरिका रिटर्न डाक्टर की डिक्री मिल जायेगी |होमोपैथी, नेचुरोपथी, मेग्नेट, एलेक्ट्रोमेग्नेट,यूनानी, ऐलोपथी ,आयुर्वेदिक, प्राकृतिक जिसकी चाहें उसकी |अब आप जीवन से हताश और निराश लोगों का इलाज कीजिये ऐसे रोगी मौत से पहले मरते नहीं और शादी से पहले आत्महत्या करते नहीं, तो आप पर कोई मुकदमा चले इसकी सम्भावना तो है नहीं खाली केप्सूल में पिसी शकर भरिये, शुद्ध दूध से खाने की सलाह दीजिये शुद्ध दूध मिलेगा नहीं और लाभ न होने का इल्जाम आप पर आएगा नहीं ,और जिसके यहाँ शुद्ध दूध होगा वह तो आपसे केप्सूल खरीदेगा ही क्यों वो जीवन से हताश और निराश होगा ही क्यों |

यदि इनसे भी आप भूंख से न बच सकें तो "" लोगों को मूर्ख बनाकर धन कमाने के सौ तरीके ""नामक” मेरी पुस्तक के विक्रय प्रतिनिधि बन जाइये

Wednesday, August 12, 2009

योग से बढकर है योगा

योग तो पुरानी बात है अत उन्होंने योगा करने की ठानी -वैसे भी कुछ लोगों के लिए योगा लाभ की बजाय फेशन की बस्तु ज़्यादा है उनके आधे मोहल्ले और जान पहचान वालों को विदित हो चुका है की श्री मान जी योगा करते हैं फिर भी उनके बच्चों की यही इच्छा रह्ती है की दोराने योगा कोई आए उनसे पापा के वारे में पूछे और वे फक्र से बताएं की पापा इस वक्त योगा कर रहे हैं |

इसके लिए उन्होंने २५ मिनट का समय चुना घर के सब सदस्यों को निर्देश था की इस अवधि में सब चुप रहें - पापाजी डिस्टर्ब न हों इसलिए बडी लडकी कमरे के किवाड़ बंद करके अंदर से सांकल चढा देती और बाहर से छोटी लडकी किवाड़ ठोकती रहती रोटी चिल्लाती रहती पत्नी झुंझलाती रहती और लड़का आवाज़ बंद करके किरकेट मैच देखता रहता - जब वे योगा करने बैठते तो घड़ी सामने रख लेते -शांती से बैठने में इन पच्चीस मिनट में वे ३५ बार आसन बदलते और ७५ मरतबा घड़ी देखले की कब पच्चीस मिनट पूरे हों और वे शबासन में लेटें|

जैसे साल में दो बार नौ दिन तक पारायण करने वाले पहले से ही विश्राम पर निशान लगा देते हैं और आधे घंटे बाद ही शेष बचे प्रष्ठ गिनने लगते हैं फिर बचे हुए दोहे गिनने लगते हैं और जैसे जैसे विश्राम नजदीक आने लगता है उन्हें विश्राम मिलने लगता है -ठीक वैसे ही जैसे जैसे सुई पच्चीस मिनट की और बढ़ती इनकी प्रसन्नता बढ़ने लगती -इनके चेहरे की प्रसन्नता देख कर बच्चे समझते की पापाजी को योगा से ब्लेसनेस प्राप्त हो रही है|

` शबासन उन्हें अत्यन्त प्रिय लगा जैसे अजगर से कह दिया जाए की तुम १५ मिनट चुपचाप पडे रहो या उन शंकर जी से जो "शंकर सहज सुरूप तुम्हारा -लगी समधी अखंड अपारा और =बीते संबत सहस सतासी -तजी समधी संभु अविनासी से कहा जाए तुम दस मिनट का मेडी टेशन 'क्या फर्क पढेगा वैसे ही तो वे यूँ ही दिनरात पलंग पर डले रहते है अब तो शब आसन है -पहले तो पत्नी की टोकाटाकी थी सब्जी ले आते -चक्की पर चले जाते -एकाध बाल्टी पानी भरवा देते आदि इत्त्यादी -अब तो योगा है कोई रोक टोक ही नहीं|

किताबी निर्देशों के मुताबिक वे कमर सीधी करके बैठते मगर आदत के मुताबिक आधा मिनट में ही कमर झुकजाती -ध्यान के क्षेत्र में इसे सुबह लक्ष्ण माना जाता है - बशर्ते कमर ध्यान में डूबने पर झुके मगर यहाँ तो आदतन झुक रही है -शायद दुश्यन्त्जी ने ऐसे ही मोकों के लिए कहा होगा =ये जिस्म बोझ से दबकर दुहरा हुआ होगा -में सजदे में नहीं था आपको धोका हुआ होगा =|

आज उनके पास योगा का सचित्र और विचित्र -प्राचीन और नवीन हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा में बहुत सा साहित्य एकत्रित हो गया है -पतंजली जी ने जितने आसन बताए होंगे उनसे ज़्यादा ये जानने लगे हैं -योगी वशिष्ठ ने योग से जितने लाभ बताए होंगे उनसे ज़्यादा योगा से होने वाले लाभ इन्हेंयाद हैं|

एक दिन मैंने उनसे पूछा की तुम मेरे अज़ीज़ हो -ये किताबी ज्ञान मुझे मत बतलाना -ये तो सब मैंने भी पढ़ सुन रखे हैं -तुम तो यह बतलाओ की तुम्हे हासिल क्या हुआ -क्या उपलब्धी हुई =तो उन्होंने शेर के गले में फंसी हड्डी का किस्सा सुना दिया की अगर शेर के गले में फंसी हड्डी लम्बी चोंच वाला सारस निकाल दे और शेर से पारिश्रमिक या ईनाम मांगे -तो भइया सबसे बडा ईनाम तो यही है की चोंच साबुत बाहर निकल आई इसी प्रकार सबसे बडी उपलब्धी तो यही है की वर्तमान शोर प्रदूषण के युग में हमारा परिवार आधा घंटा चुप रहकर विश्व की सेवा कर रहा है|

शोर से होने वाली हानी के बारे में आम लोगों को जानकार नहीं है -जिनको जानकारी है वे खामोश है -हवाई जहाज -मोटर -ट्रक -रेल फेक्टरी आतिश्वाज़ी पठाके लाउड इस्पीकर फुल आवाज़ में अपने घर में रेडियो या टी वी चलाना इनसे दिल के रोगी को -नवजात शिशु को -अशक्त ब्रद्धों को -गर्भवती महिला को क्या क्या नुकसान होते है हम नहीं जानते =रेलवे लाइन के निकट वाशिंदों को क्या क्या रोग घेर लेते है यह भी हमको पता नहीं है =दीवाली पर पठाके चलाने वाबत सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे हमने उन्हें कितना माना =बोलने से कितना नुकसान होता है हमें पता नहीं =गंभीर रोगी को डाक्टर बोलने से क्यों मना करता है सोचा नहीं|

उनकी बात मुझे सटीक लगी काश हम भी थोड़ा थोड़ा चुप रहकर वातावरण में फैल रहे शोर प्रदूषण को कम करने में सहायक बनें

Saturday, August 1, 2009

सलाह

अक्लमंद को सलाह की ज़रुरत नहीं और मूर्ख सलाह मानते नहीं |

मुझे सलाह दी गई ,स्वाभाविक है मैं भी नहीं मानूंगा, मगर मैंने उसे निर्देश के तौर पर लिया |निर्देश कुछ इस प्रकार है कि जो अपनी नजरों में खुद को बे-इज्जत करता है, 'वक्त'एक रोज उसकी यही कुत्ता फजीहत करता है...

बात बिलकुल सही है

जब दूसरे मौजूद हैं तो खुद को अपनी नज़रों से क्यों बे-इज्ज़त करना?

कुत्ता फजीहत क्या होती है अनुभव नहीं है ,कभी हुई ही नहीं, लिखा है धोबी का कुत्ता! तो वह तो मैं हूँ ही |मेरा न घर है न घाट |जफ़रजी के शब्दों में कहूं तो मैं न किसी के दिल का करार हूँ, न किसी की आँख का नूर हूँ , मेरा रंग रूप (जो थोडा बहुत पहले कभी रहा होगा) बिगड़ गया है ,मेरा यार मुझसे बिछड़ गया है, मेरा चमन उजड़ गया है (चमन उजड़ गया है ,मतलब , मैं गंजा नहीं हुआ हूँ, वो क्या है ,किसी फिल्म में नाना पाटेकर द्वारा एक गंजे को 'उजड़ा चमन 'शब्द प्रयुक्त किया गया है |,माशाअल्लाह मेरे बाल अभी बचे भी हैं .और मेरे बाल बच्चे भी हैं )

क्या खुद की कमजोरियां बताना ,अपने दुर्गुणों का सार्वजानिक प्रदर्शन , खुद को नज़रों से गिराना है ?

श्रीमानजी कह रहे थे जब मैं अपने जवानी के दिन याद करता हूँ तो मुझे अपने आप से बड़ी नफरत होने लगती है |
क्यों ऐसा क्या किया जवानी के दिनों में ?
बोले -कुछ भी नहीं किया |

टिप्पणी कार भाग ३ को बेहूदगी भरी कहा गया |बेहूदगी कहाँ नहीं है तलाशने वाला चाहिए |इंटरनेट खोल कर देखिये बेहूदगी का अम्बार मिलेगा -इंटरनेट ही क्यों ? आजकल जो टीवी पर सत्य बोलकर इनाम पाने की प्रथा चल रही है जिसमे लड़कियां स्वीकार कर रहीं हैं ,जब वे नाबालिग़ थी तभी .........|शादी शुदा औरत कह रही है की वह पैसों के लिए ........|और उनके पति दर्शकों से मुंह छुपा रहे है |पुरुष यह स्वीकार कर रहे हैं उन्हें वह सब नाम याद हैं जिनके साथ .........| यदि यह बेहूदगी नहीं सभ्यता और संस्कृति है तो मैं अपने लिखे हुए को बेहूदा मानने में कोई लज्जा या संकोच महसूस नहीं करता |

,अपने को दीनहीन दयनीय बताना क्या, खुद को बेईज्ज़त करना है ?|कबीर ने तो कहा जब में बुरा देखने चला तो पाया मुझसे बुरा कोई है ही नहीं |तुलसी दास जी ने कहा यदि मैं अपने सब अवगुण कहने लगूंगा तो कथा बढ़ जायेगी, ग़ालिब साहिब ने कहा यदि मैं शराबी न होता तो लोग मुझे बली समझते , किसी ने कहा 'रोड़ा ह्वे रहु बाट का ताज पाखंड अभिमान |बंगले में साहब के साथ कुत्ता नाश्ता कर रहा हो और बंगले के बाहर कोई लड़का कचरे में से खाने को कुछ ढूंढ रहा हो और अगर वह कहदे कि मुझसे तो यह कुत्ता अच्छा है तो क्या उसने अपने आप को अपनी नज़रों से बेईज्ज़त कर लिया|
ईश्वर के सामने गुनाह कबूल करना क्या अपने को बेइज्जत करना है |

श्रीमानजी ईश्वर के दरबार में गुनाह कुबूल कर रहे थे "मैं पापी हूँ मैंने ये किया ,वो किया आदि |सहसा अहसास हुआ कि पीछे कोई है, देखा एक व्यक्ति खडा था ,पूछा तूने कुछ सुना तो नहीं ,बोला मैंने सब सुना |श्रीमानजी उसे एक तरफ ले गए बोले 'देख किसी को या बात बतला मत देना नहीं तो ठीक न होगा 'फिर उन्होने अपनी एक जेब से नोटों से भरा पर्स निकला और दूसरी से पिस्टल निकाली और 'लगे रहो मुन्ना भाई 'फिल्म के लक्की सिंह की स्टाइल में कहा 'ये वेलेट है ये बुलेट है तू चूज कर|

कोई तय कर ही ले कि बेहूदगी खोजना ही है तो असंभव नहीं है |वैसे सुना है नेपोलियन कहा करता था कि उसकी डिक्शनरी में असंभव शब्द है ही नहीं (अल्ला जाने किस प्रकाशक की डिक्शनरी थी उनके पास ) तलाशने वाले ग्रन्थ ,साहित्यिक लेख ,कविता किसी में से भी बेहूदगी तलाश कर सकते हैं|

एक मैडम के मकान के पास तालाव था ,बच्चे उसमे स्नान करते थे निर्वस्त्र |पुलिस को सूचना दी मुझे क्षोभ होता है |पुलिस ने बच्चों के समझा दिया कि यहाँ के वजाय दो किलोमीटर दूर तलाव है उसमें नहा लिया करो |

पुलिस के पास फिर सूचना आई मुझे क्षोभ होता है |

मगर मैडम वो तो दो किलोमीटर दूर तालाव है वहां नहाने लगे हैं

तो क्या हुआ मैंने दूरबीन खरीद ली है