हाइकू या हायकूं का नियम पता चला पहली और तीसरी लाइन में पांच और दूसरी में सात अक्षर होने चाहिए /हाइकू लिखा (५)जैसा निदेश मिला (७) पालन किया (५) /कोशिश की /
(१)
पोंछा लगाया
अदा की अदा हुई
काम का काम
(२)
तू तू न मैं मैं
कोई चार्म नहीं है
ऐसे जीने में
(३)
कविता सुनी
समझ में न आई
वीन बजाई
(४)
जमीन पैसा
मार दिया बूढी को
डायन जो थी
Tuesday, November 25, 2008
हाय क्यूं
हाइकू या हायकूं का नियम पता चला पहली और तीसरी लाइन में पांच और दूसरी में सात अक्षर होने चाहिए /हाइकू लिखा (५)जैसा निदेश मिला (७) पालन किया (५) /कोशिश की /
(१)
पोंछा लगाया
अदा की अदा हुई
काम का काम
(२)
तू तू न मैं मैं
कोई चार्म नहीं है
ऐसे जीने में
(३)
कविता सुनी
समझ
में न आई
वीन बजाई
(४)
जमीन पैसा
मार दिया बूढी को
डायन जो थी
(१)
पोंछा लगाया
अदा की अदा हुई
काम का काम
(२)
तू तू न मैं मैं
कोई चार्म नहीं है
ऐसे जीने में
(३)
कविता सुनी
समझ
में न आई
वीन बजाई
(४)
जमीन पैसा
मार दिया बूढी को
डायन जो थी
Saturday, November 22, 2008
चलता रहा
चला चलता रहा
कंटकपथ,पथरीली राहें,दलदल
कटा, फटा, जुडा, सिला ,सहा भी
पीड़ा, वेदना, ताप
थका ,गिरा ,उठा ,गिरा
अपना सुख विस्मृत कर ,निवाहा भी
जन्म-सिद्ध कर्तव्य
अब जर्जर ,चिर-पथझड़,परवशता भी
निराश्रित ,उपेक्षित ,बेकार
क्या हूँ ?
रिटायर
या
रिजेक्टेड टायर
कंटकपथ,पथरीली राहें,दलदल
कटा, फटा, जुडा, सिला ,सहा भी
पीड़ा, वेदना, ताप
थका ,गिरा ,उठा ,गिरा
अपना सुख विस्मृत कर ,निवाहा भी
जन्म-सिद्ध कर्तव्य
अब जर्जर ,चिर-पथझड़,परवशता भी
निराश्रित ,उपेक्षित ,बेकार
क्या हूँ ?
रिटायर
या
रिजेक्टेड टायर
Saturday, November 15, 2008
आराम
वाहन रिपेयर की दुकान पर ,मिस्त्री को पेंचकस देता
केन्टीन से दफ्तर और नर्सिगहोम के वार्ड में
दौड़ दौड़ कर चाय पहुंचाता
पेपर बांटता ,पालिश करता ,डांट खाता ,मार खाता
शनिवार को स्कूल छोड़ स्टेशन पर
शनि महाराज बन जाता
अपनी फटी कमीज़ निकाल रेल के डब्बे साफ़ करता
हलबाई की दूकान पर ,आंखों से मिस्ठान्न का स्वाद ग्रहण करता
कडाही मांजता
फ़िल्म देखता ,जेब काटता ,गाली बकता
आठ साल की उम्र में
साठ साल का अनुभव पाता
दिवस मना कर ,भाषण देकर ,मीठा खाकर पान चबा कर
कार में बैठते महोदय से पूछा
सरकार -सुख शान्ति ,चैन ,आराम ,विश्राम
हम कैसे पायेंगे ?
बोले चिंता मत करो
तुम्हारे आराम को ,हम ,पैसा पानी की तरह बहायेंगे
और आगामी वर्षों में
करोड़ों बोरबेल ख़ुद जायेंगे
केन्टीन से दफ्तर और नर्सिगहोम के वार्ड में
दौड़ दौड़ कर चाय पहुंचाता
पेपर बांटता ,पालिश करता ,डांट खाता ,मार खाता
शनिवार को स्कूल छोड़ स्टेशन पर
शनि महाराज बन जाता
अपनी फटी कमीज़ निकाल रेल के डब्बे साफ़ करता
हलबाई की दूकान पर ,आंखों से मिस्ठान्न का स्वाद ग्रहण करता
कडाही मांजता
फ़िल्म देखता ,जेब काटता ,गाली बकता
आठ साल की उम्र में
साठ साल का अनुभव पाता
दिवस मना कर ,भाषण देकर ,मीठा खाकर पान चबा कर
कार में बैठते महोदय से पूछा
सरकार -सुख शान्ति ,चैन ,आराम ,विश्राम
हम कैसे पायेंगे ?
बोले चिंता मत करो
तुम्हारे आराम को ,हम ,पैसा पानी की तरह बहायेंगे
और आगामी वर्षों में
करोड़ों बोरबेल ख़ुद जायेंगे
Thursday, November 13, 2008
उस पार चलो
हम तो जाते हैं दिलदार .'चाँद के पार
यहाँ आपको क्या कष्ट है यार
इस पार प्रिये तुम हो ,गम है , बम है
उस पार तो कुछ अच्छा होगा
जीवन अनिश्चित का धर्मशास्त्र
अपराधी के अधिकार का विधिशास्त्र
पुत्री ,दुल्हन ,रक्षाकर्मी की मौत का कर्म शास्त्र
केन्टीन में प्लेट धोने बच्चे मजबूर
इज्जत और बैंक लुटने का यहाँ दस्तूर
जनता के नौकर जनता के सेवक से पिटते हैं
दूल्हा ,वोट और जनता के प्रश्न यहाँ बिकते हैं
ये नियति शास्त्र है
जिंदा रहेगी लुटेगी पिटेगी
सर मुंडवा कर कोने में पड़ेगी
हक की तो बात क्या दानों को तरसेगी
उपेक्षा ,निराशा ,उत्पीडन की आशंका से विधवा जल गई
मन्दिर बन गया आरती उतर गई
ये यहाँ का रीतिशास्त्र है
पाँच किलो वजनपर सातकिलो का बस्ता बुध्धिशास्त्र है
और दवा मेह्गी कफ़न सस्ता ये यहाँ का अर्थशास्त्र है
उस पार शास्त्र तो कम होंगे
उसपार तो कुछ अच्छा होगा
यहाँ आपको क्या कष्ट है यार
इस पार प्रिये तुम हो ,गम है , बम है
उस पार तो कुछ अच्छा होगा
जीवन अनिश्चित का धर्मशास्त्र
अपराधी के अधिकार का विधिशास्त्र
पुत्री ,दुल्हन ,रक्षाकर्मी की मौत का कर्म शास्त्र
केन्टीन में प्लेट धोने बच्चे मजबूर
इज्जत और बैंक लुटने का यहाँ दस्तूर
जनता के नौकर जनता के सेवक से पिटते हैं
दूल्हा ,वोट और जनता के प्रश्न यहाँ बिकते हैं
ये नियति शास्त्र है
जिंदा रहेगी लुटेगी पिटेगी
सर मुंडवा कर कोने में पड़ेगी
हक की तो बात क्या दानों को तरसेगी
उपेक्षा ,निराशा ,उत्पीडन की आशंका से विधवा जल गई
मन्दिर बन गया आरती उतर गई
ये यहाँ का रीतिशास्त्र है
पाँच किलो वजनपर सातकिलो का बस्ता बुध्धिशास्त्र है
और दवा मेह्गी कफ़न सस्ता ये यहाँ का अर्थशास्त्र है
उस पार शास्त्र तो कम होंगे
उसपार तो कुछ अच्छा होगा
Wednesday, October 29, 2008
आज की जरूरत ब्रद्धाश्रम
ब्रद्ध का परिवार और परिवार का ब्रद्धों के जीवन में ,आवश्यक -अनावश्यक, उचित -अनुचित जो भी हो उस हस्तक्षेप की प्राचीन मनोवृत्ति बदलते परिवेश के साथ पल्लवित व पुष्पित होती गई , स्वार्थपरता ने पारस्परिक संभाषण और परामर्श के मार्ग अवरुद्ध किए ,वार्तालाप होता भी है तो वह तत्क्षण पूर्णिमा के उद्वेलित सिन्धुबारि में परिवर्तित हो जाता है /
मंदोदरी ने रावण से कहा था ""सुत कहुं राज समर्पि बन जाई भजिय रघुनाथ "" राजा सत्यकेतु ने प्रतापभानु को जिम्मेदारी सौंपी "" जेठे सुतहि राज नृप दीन्हां,हरि हित आपु गवन बन कीन्हां "" तो राजा मनुने बरवस राज सुतहिं तब दीन्हां ,नारी समेत गवन बन कीन्हां "" और जिन्होंने नहीं किया इतिहास हमें समझाइश देता है कि बादशाहों को पुत्रों ने या तो कैद में डाल दिया या उनकी हत्या कर दी गई/
जिस ब्रद्ध के पैर कब्र में लटके हों [ये एक मुहाबरा है ] जो पके आम के तुल्य कभी भी टपक जाय [ ये भी एक मुहाबरा है ] मरघट जिसकी बाट जोहता हो [ ये भी एक मुहाबरा है ][और मुहाबरे मुझे याद नहीं हैं ] ऐसे मुहाबरों से सुसज्जित और सुशोभित की मानसिकता और मानसिक रोगों में उर्बरक का कार्य करने वाली ब्रद्धावस्था का व्यक्ति मानसिक रोगी होकर क्रन्दोंमुख रहकर परिवार की शान्ति भंग न करे ,इसलिए इन्हे ब्ब्रद्धआश्रम के आश्रित करदेना समीचीन है /
मैं देश की संस्कृति के विपरीत नहीं /मात पिता गुरु नवहि माथा के विरुद्ध नहीं -बुजुर्गों की क्षत्रछाया में परिवार फले फूले इसके ख़िलाफ़ नहीं -औलाद बाप की सेवा करे इससे बडा पुन्य नहीं =इस पुन्य के बदले हम ब्रद्ध पर अन्याय तो नहीं कर रहे ? ब्रद्ध के वाबत धारणा है कि वह उदास रहे ,कम बोले ,निर्वाक और निस्पंद रहे [ऐसा किसी फ़िल्म में बताया भी है शायद ] माला फेरे ,भजन करे इसके बरखिलाफ वह फिल्मी गाना गाने लगे ,किसी गाने पर कमर हिलादे ,ठुमका लगा दे [बच्चन जी की बात अलग है ] तो वह स्वम हास्यास्पद तो होगा ही ,उसे किन किन उपमाओं से बिभूषित कर लज्जित किया जाएगा कल्पनातीत है /वह स्वम भी लज्जाजनक व्याकुलता अनुभव करेगा और अपनी स्वतंत्रता और मनोगत दबी इच्छाओं का हनन कर दिल की प्रसन्नता को उदासीनता के आवरण में रख कर आयु और स्वस्थ्य की भित्तिमूल का ध्वंस करेगा /
ब्रद्धावस्था की अपेक्षा है कि कोई उनसे बात करे उनके ज़माने के उनसे किस्से सुने /बुजुर्गों को अपनी युवावस्था के किस्से सुनाने की बहुत उत्सुकता रहती है जो स्वाभाविक है /सम्पाती ने अपनी जवानी के किस्से सुनाये ""हम द्वो बन्धु प्रथम तरुनाई ,गगन गए रवि निकट उडाई /""तो जाम्बंत कहने लगे ""बलि बांधत प्रभु वाढेऊ सो तनु बरनि न जाय , उभय घरी मह दीन्ही सात प्रदच्छिन जाय "" पहले फुरसत थी आज होमबर्क़ करें ,ओवर टाईम ड्यूटी करें कि इनकी सुनें /
इन्हे चाहिए पुराने लोग ,ऐसे साथी जिनसे ये दिल खोल कर अश्लील से लेकर आध्यात्मिक तक ,राखी से लेकर सुरया तक ,पॉप से लेकर कुंदनलाल सहगल तक अपने जमाने से स्वर्ण युग से वर्तमान के घोर कलयुग तक बातें कर सकें =खुश होकर हंस सकें दुखी होकर रो सकें अपने बिछुडे जीवन साथी के साथ बिताये सुख दुःख की बातें शेयर कर पुलकित या ग़मगीन हो सकें /
कुछ संपन्न ब्रद्ध इन आश्रमों की ओर आकर्षित होकर ,जीवन का आनंद लेना सीख कर ,इन लोगों के साथ कुछ जियें तो इन आश्रमों के प्रति लोगों का द्रष्टिकोण बदल सकता है = बरना तो नगर से दूर बनाये गए ब्रद्ध आश्रमों में कुछ बुजुर्ग उपेक्षित से पड़े हुए ,मरने की वाट जोहते हुए जीते रहते हैं
मंदोदरी ने रावण से कहा था ""सुत कहुं राज समर्पि बन जाई भजिय रघुनाथ "" राजा सत्यकेतु ने प्रतापभानु को जिम्मेदारी सौंपी "" जेठे सुतहि राज नृप दीन्हां,हरि हित आपु गवन बन कीन्हां "" तो राजा मनुने बरवस राज सुतहिं तब दीन्हां ,नारी समेत गवन बन कीन्हां "" और जिन्होंने नहीं किया इतिहास हमें समझाइश देता है कि बादशाहों को पुत्रों ने या तो कैद में डाल दिया या उनकी हत्या कर दी गई/
जिस ब्रद्ध के पैर कब्र में लटके हों [ये एक मुहाबरा है ] जो पके आम के तुल्य कभी भी टपक जाय [ ये भी एक मुहाबरा है ] मरघट जिसकी बाट जोहता हो [ ये भी एक मुहाबरा है ][और मुहाबरे मुझे याद नहीं हैं ] ऐसे मुहाबरों से सुसज्जित और सुशोभित की मानसिकता और मानसिक रोगों में उर्बरक का कार्य करने वाली ब्रद्धावस्था का व्यक्ति मानसिक रोगी होकर क्रन्दोंमुख रहकर परिवार की शान्ति भंग न करे ,इसलिए इन्हे ब्ब्रद्धआश्रम के आश्रित करदेना समीचीन है /
मैं देश की संस्कृति के विपरीत नहीं /मात पिता गुरु नवहि माथा के विरुद्ध नहीं -बुजुर्गों की क्षत्रछाया में परिवार फले फूले इसके ख़िलाफ़ नहीं -औलाद बाप की सेवा करे इससे बडा पुन्य नहीं =इस पुन्य के बदले हम ब्रद्ध पर अन्याय तो नहीं कर रहे ? ब्रद्ध के वाबत धारणा है कि वह उदास रहे ,कम बोले ,निर्वाक और निस्पंद रहे [ऐसा किसी फ़िल्म में बताया भी है शायद ] माला फेरे ,भजन करे इसके बरखिलाफ वह फिल्मी गाना गाने लगे ,किसी गाने पर कमर हिलादे ,ठुमका लगा दे [बच्चन जी की बात अलग है ] तो वह स्वम हास्यास्पद तो होगा ही ,उसे किन किन उपमाओं से बिभूषित कर लज्जित किया जाएगा कल्पनातीत है /वह स्वम भी लज्जाजनक व्याकुलता अनुभव करेगा और अपनी स्वतंत्रता और मनोगत दबी इच्छाओं का हनन कर दिल की प्रसन्नता को उदासीनता के आवरण में रख कर आयु और स्वस्थ्य की भित्तिमूल का ध्वंस करेगा /
ब्रद्धावस्था की अपेक्षा है कि कोई उनसे बात करे उनके ज़माने के उनसे किस्से सुने /बुजुर्गों को अपनी युवावस्था के किस्से सुनाने की बहुत उत्सुकता रहती है जो स्वाभाविक है /सम्पाती ने अपनी जवानी के किस्से सुनाये ""हम द्वो बन्धु प्रथम तरुनाई ,गगन गए रवि निकट उडाई /""तो जाम्बंत कहने लगे ""बलि बांधत प्रभु वाढेऊ सो तनु बरनि न जाय , उभय घरी मह दीन्ही सात प्रदच्छिन जाय "" पहले फुरसत थी आज होमबर्क़ करें ,ओवर टाईम ड्यूटी करें कि इनकी सुनें /
इन्हे चाहिए पुराने लोग ,ऐसे साथी जिनसे ये दिल खोल कर अश्लील से लेकर आध्यात्मिक तक ,राखी से लेकर सुरया तक ,पॉप से लेकर कुंदनलाल सहगल तक अपने जमाने से स्वर्ण युग से वर्तमान के घोर कलयुग तक बातें कर सकें =खुश होकर हंस सकें दुखी होकर रो सकें अपने बिछुडे जीवन साथी के साथ बिताये सुख दुःख की बातें शेयर कर पुलकित या ग़मगीन हो सकें /
कुछ संपन्न ब्रद्ध इन आश्रमों की ओर आकर्षित होकर ,जीवन का आनंद लेना सीख कर ,इन लोगों के साथ कुछ जियें तो इन आश्रमों के प्रति लोगों का द्रष्टिकोण बदल सकता है = बरना तो नगर से दूर बनाये गए ब्रद्ध आश्रमों में कुछ बुजुर्ग उपेक्षित से पड़े हुए ,मरने की वाट जोहते हुए जीते रहते हैं
Tuesday, October 28, 2008
जोक तथा संदेश [१०]
जोक :- राघोगढ़ में बिरजू की दालान में किसान बैठे थे एक किसान कहने लगा दादा मेरी भैंस बीमार हो रही है उसने बीमारी के लक्षण बताये / बिरजू बोले =भैया ऐसी की ऐसी हालत मेरी भैंस की हो गई थी -मैंने तो अलसी का तेल पिला दिया था /
दूसरे दिन सुबह ६ बजे किसान ने बिरजू का दरवाजा खटखटाया
किसान ++बिरजू भइया बिरजू भइया
बिरजू दरवाजा खोलते हुए =काहे का बात है
किसान -दादा तेल पिलाने से मेरे भैंस तो मर गई
बिरजू _भइया मेरी कौन बच गई थी
संदेश +किसी बात को पूरी तरह सुन कर, समझ कर, काम करने की हमारी आदत ही नहीं रही /बच्चा अगर स्कूल से आकर कह दे कि पापा मुझे स्कूल का ब्लेक्बोर्ड दिखाई नहीं देता तो हम भागे भागे -घबराए हुए से -बैचैन से -अनिष्ट की आशंका के भयभीत उसे डाक्टर के पास ले जायेंगे =यह तो हमें डाक्टर के घर जाकर मालूम पड़ेगा कि स्कूल में उसकी सीट के आगे एक बड़ा लड़का बैठ जता है /
दूसरी बात जहाँ ६ आदमी बैठे हों समझ लेना वहाँ सात डाक्टर बैठे हुए है / कभी करके देखना /रेल के डिब्बे में थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में [अब तो खैर उसे सेकेण्ड क्लास कर दिया है -क्या हुआ जो नाम बदल दिया -क्लर्क कार्यालय सहायक हो गए काम वही ,ओवरसीयर सब इंजीनियर कहे जाने लगे /एक गरीब नगर का राजा परेशान चाहता था उसकी प्रजा दूध पिए मगर उपलब्धता के आभाव में बेचारे छाछ पीते थे /एक दिन राजा ने सार्वजनिक घोषणा जारी करदी कि कल से सब लोग छाछ को दूध कहेंगे और दूसरे दिन से उस राजा की प्रजा दूध पीने लगी /]हाँ तो रेल में किसी बीमारी का ज़िक्र कर देना जुकाम से लेकर केंसर तक मिटाने के नुस्खे मिल जायेंगे और वो भी प्रूफ़ के साथ कि फलां अच्छा हुआ =फलां दस माह से विस्तर में पडा था और अब दौड़ लगा रहा है /टूटी हड्डी जोड़ने की दबाई =भइया दबाई नहीं खाओगे तो भी जुड़ेगी उसे तो जुड़ना ही है / एक महाराज जी की धूनी में चिमटा लगा रहता था आग से निकाल कर लाल चिमटा मरीज़ के अंग में छुला देते /एक सज्जन को साइटिका हो गया -डाक्टर ने २१ दिन का ट्रेक्शन बताया /एक दिन महाराज जी के पास से बड़े खुश होकर लौट रहे थे बोले देखो डाक्टर वेबकूफ बना रहे थे =महाराज ने घुटने में दो जगह और एडी में दो जगह चिमटा से जलाया और देखो मैं कितना बढ़िया चल पा रहा हूँ /पाँच दिन बाद एक दिन वे अस्पताल में दिखे पूछा "क्यों बाबूजी "? बोले यार बो घुटना और एडी के जख्म पक गए तो ड्रेसिंग कराने आया था /
दूसरे दिन सुबह ६ बजे किसान ने बिरजू का दरवाजा खटखटाया
किसान ++बिरजू भइया बिरजू भइया
बिरजू दरवाजा खोलते हुए =काहे का बात है
किसान -दादा तेल पिलाने से मेरे भैंस तो मर गई
बिरजू _भइया मेरी कौन बच गई थी
संदेश +किसी बात को पूरी तरह सुन कर, समझ कर, काम करने की हमारी आदत ही नहीं रही /बच्चा अगर स्कूल से आकर कह दे कि पापा मुझे स्कूल का ब्लेक्बोर्ड दिखाई नहीं देता तो हम भागे भागे -घबराए हुए से -बैचैन से -अनिष्ट की आशंका के भयभीत उसे डाक्टर के पास ले जायेंगे =यह तो हमें डाक्टर के घर जाकर मालूम पड़ेगा कि स्कूल में उसकी सीट के आगे एक बड़ा लड़का बैठ जता है /
दूसरी बात जहाँ ६ आदमी बैठे हों समझ लेना वहाँ सात डाक्टर बैठे हुए है / कभी करके देखना /रेल के डिब्बे में थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में [अब तो खैर उसे सेकेण्ड क्लास कर दिया है -क्या हुआ जो नाम बदल दिया -क्लर्क कार्यालय सहायक हो गए काम वही ,ओवरसीयर सब इंजीनियर कहे जाने लगे /एक गरीब नगर का राजा परेशान चाहता था उसकी प्रजा दूध पिए मगर उपलब्धता के आभाव में बेचारे छाछ पीते थे /एक दिन राजा ने सार्वजनिक घोषणा जारी करदी कि कल से सब लोग छाछ को दूध कहेंगे और दूसरे दिन से उस राजा की प्रजा दूध पीने लगी /]हाँ तो रेल में किसी बीमारी का ज़िक्र कर देना जुकाम से लेकर केंसर तक मिटाने के नुस्खे मिल जायेंगे और वो भी प्रूफ़ के साथ कि फलां अच्छा हुआ =फलां दस माह से विस्तर में पडा था और अब दौड़ लगा रहा है /टूटी हड्डी जोड़ने की दबाई =भइया दबाई नहीं खाओगे तो भी जुड़ेगी उसे तो जुड़ना ही है / एक महाराज जी की धूनी में चिमटा लगा रहता था आग से निकाल कर लाल चिमटा मरीज़ के अंग में छुला देते /एक सज्जन को साइटिका हो गया -डाक्टर ने २१ दिन का ट्रेक्शन बताया /एक दिन महाराज जी के पास से बड़े खुश होकर लौट रहे थे बोले देखो डाक्टर वेबकूफ बना रहे थे =महाराज ने घुटने में दो जगह और एडी में दो जगह चिमटा से जलाया और देखो मैं कितना बढ़िया चल पा रहा हूँ /पाँच दिन बाद एक दिन वे अस्पताल में दिखे पूछा "क्यों बाबूजी "? बोले यार बो घुटना और एडी के जख्म पक गए तो ड्रेसिंग कराने आया था /
Subscribe to:
Posts (Atom)
